लगातार बैठकर काम करने से नसों की सेहत पर खतरा, बढ़ सकता है रक्त के थक्के का जोखिम
लंबे समय तक बिना हिले-डुले काम करने से पैरों में रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है; नियमित गतिविधि, बीच-बीच में चलना और शुरुआती लक्षणों की पहचान जरूरी

डिजिटल कार्य संस्कृति और कार्यालयों में बढ़ते स्क्रीन आधारित काम के कारण लोगों के बैठने का समय लगातार बढ़ रहा है। कई कर्मचारी प्रतिदिन आठ से दस घंटे तक कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करते हैं और व्यस्तता के कारण बीच में उठना या चलना भी भूल जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक लगातार बैठे रहना रक्त संचार के लिए नुकसानदेह हो सकता है। कुछ परिस्थितियों में इससे पैरों की गहरी नसों में रक्त का थक्का बनने की आशंका बढ़ सकती है। इस स्थिति को डीप वेन थ्रोम्बोसिस (डीवीटी) कहा जाता है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि केवल स्क्रीन पर काम करना सीधे डीवीटी का कारण नहीं है। लंबे समय तक गतिहीन रहना, पहले से मौजूद बीमारियां और अन्य जोखिम कारक मिलकर इस खतरे को बढ़ा सकते हैं।
क्या है डीप वेन थ्रोम्बोसिस?
डीप वेन थ्रोम्बोसिस वह स्थिति है जिसमें शरीर की किसी गहरी नस, विशेषकर पैर या जांघ की नस में रक्त का थक्का बन जाता है। इससे प्रभावित हिस्से में रक्त का प्रवाह बाधित हो सकता है। कुछ मामलों में थक्के का हिस्सा टूटकर फेफड़ों तक पहुंच सकता है और फुफ्फुसीय रक्तवाहिका अवरोध जैसी जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है।
डीवीटी के संभावित लक्षणों में एक पैर में सूजन, पिंडली में दर्द या संवेदनशीलता, त्वचा का गर्म होना तथा लालिमा या रंग में बदलाव शामिल हैं। हालांकि, कुछ मरीजों में स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।
लंबे समय तक बैठना क्यों है जोखिमपूर्ण?
जब व्यक्ति लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठा रहता है, तो पैरों की मांसपेशियों की गतिविधि कम हो जाती है। सामान्य परिस्थितियों में ये मांसपेशियां रक्त को हृदय की ओर लौटाने में सहायता करती हैं। लगातार निष्क्रिय रहने से रक्त प्रवाह धीमा हो सकता है और कुछ लोगों में थक्का बनने का जोखिम बढ़ सकता है।
विशेष रूप से लंबी विमान या सड़क यात्रा, हाल की बड़ी शल्य चिकित्सा, अस्पताल में लंबे समय तक भर्ती रहना, कैंसर, गर्भावस्था, पहले डीवीटी होना और कुछ आनुवंशिक स्थितियां जोखिम को बढ़ा सकती हैं। इसलिए कार्यालय में बैठकर काम करने वालों को अपनी दिनचर्या के साथ अन्य स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों पर भी ध्यान देना चाहिए।
कौन-से लक्षण नजरअंदाज नहीं करने चाहिए?
- एक पैर या पिंडली में अचानक सूजन।
- पैर में नया या असामान्य दर्द अथवा दबाव महसूस होना।
- प्रभावित हिस्से में गर्माहट या त्वचा के रंग में बदलाव।
- बिना स्पष्ट कारण एक पैर में सूजन या दर्द का बढ़ना।
यदि इन लक्षणों में डीवीटी की आशंका हो, तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। यदि अचानक सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, खून वाली खांसी या बेहोशी हो, तो यह आपातकालीन स्थिति हो सकती है और तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
बचाव के लिए क्या करें?
कार्यालय में काम करने वाले लोग कुछ सरल आदतों को अपनाकर लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से बच सकते हैं।
- नियमित अंतराल पर उठें: हर 30 से 60 मिनट में कुछ देर खड़े हों और चलें। यह एक व्यावहारिक आदत है, हालांकि इससे डीवीटी की रोकथाम की गारंटी नहीं मिलती।
- पैरों को सक्रिय रखें: बैठे-बैठे टखनों को ऊपर-नीचे करना और पैरों की मांसपेशियों को सक्रिय रखना उपयोगी हो सकता है।
- प्रतिदिन शारीरिक गतिविधि करें: अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलना और नियमित व्यायाम अपनाएं।
- पर्याप्त पानी पिएं: शरीर में पानी की कमी से बचें, विशेषकर लंबी यात्राओं के दौरान।
- चिकित्सकीय सलाह लें: जिन लोगों को पहले डीवीटी हो चुका है या जिनमें अन्य जोखिम कारक हैं, उन्हें व्यक्तिगत बचाव उपायों के लिए डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।
यदि डीवीटी का संदेह हो, तो पैर की मालिश करने या स्वयं रक्त पतला करने वाली दवाएं लेने के बजाय चिकित्सकीय सहायता लें।
भविष्य की चुनौती: स्वस्थ कार्यस्थल
आने वाले समय में कंपनियों के लिए कर्मचारियों की शारीरिक सक्रियता को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण होगा। कार्यालयों में छोटे गतिविधि-विराम, चलकर बैठक करने की व्यवस्था और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, केवल कार्यस्थल की व्यवस्था बदलना पर्याप्त नहीं है; कर्मचारियों को भी नियमित गतिविधि के लिए समय निकालना होगा।
निष्कर्ष
लंबे समय तक लगातार बैठकर काम करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है और कुछ लोगों में डीवीटी का जोखिम बढ़ा सकता है। लेकिन हर कार्यालय कर्मचारी को इस गंभीर बीमारी का खतरा समान रूप से नहीं होता। जोखिम कारकों की पहचान, नियमित शारीरिक गतिविधि और लक्षणों के प्रति जागरूकता महत्वपूर्ण हैं।
स्वास्थ्य का संदेश स्पष्ट है: काम के बीच छोटे-छोटे गतिविधि-विराम अपनाएं, शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें और गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।