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आईवीएफ से जन्मे बच्चों के जीनोम में ‘जंपिंग जीन्स’ पर नई रिसर्च, वैज्ञानिकों ने और अध्ययन की जरूरत बताई

अंतरराष्ट्रीय शोध में सहायक प्रजनन तकनीक और आनुवंशिक बदलावों के संबंध की जांच; विशेषज्ञों का जोर—प्रारंभिक निष्कर्षों को स्वास्थ्य जोखिम का प्रमाण न माना जाए

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IVF · Gemini Ai


सहायक प्रजनन तकनीकों ने उन लाखों दंपतियों के लिए माता-पिता बनने की उम्मीद जगाई है, जिन्हें प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में कठिनाई होती है। इन तकनीकों में इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) प्रमुख है। अब आईवीएफ से जन्मे बच्चों के आनुवंशिक विकास को लेकर एक नए शोध निष्कर्ष ने वैज्ञानिकों का ध्यान आकर्षित किया है। रिपोर्ट के अनुसार, आईवीएफ से जन्मे बच्चों के जीनोम में कुछ विशेष आनुवंशिक तत्वों, जिन्हें ‘जंपिंग जीन्स’ कहा जाता है, की गतिविधि या उपस्थिति में अंतर देखा गया है।

हालांकि, इस निष्कर्ष का अर्थ यह नहीं है कि आईवीएफ से जन्मे बच्चों में निश्चित रूप से अधिक बीमारियां होंगी। इसके लिए शोध के निष्कर्षों, अध्ययन की पद्धति और दीर्घकालिक स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों को सावधानी से समझना आवश्यक है।

क्या होते हैं ‘जंपिंग जीन्स’?

जंपिंग जीन्स को वैज्ञानिक भाषा में ट्रांसपोजेबल तत्व कहा जाता है। ये डीएनए के ऐसे हिस्से होते हैं, जो जीनोम के भीतर अपनी स्थिति बदल सकते हैं या कुछ परिस्थितियों में अपनी प्रतियां बना सकते हैं। इन्हें जीनोम के गतिशील तत्व भी कहा जाता है।

मानव जीनोम का एक बड़ा हिस्सा ऐसे तत्वों से संबंधित है। अधिकांश तत्व निष्क्रिय होते हैं या उनकी गतिविधि शरीर की विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं द्वारा नियंत्रित रहती है। कुछ सक्रिय तत्व डीएनए के कार्य और जीनों की अभिव्यक्ति को प्रभावित कर सकते हैं।

हालांकि, जंपिंग जीन्स की उपस्थिति अपने आप में बीमारी का संकेत नहीं है। उनका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सा तत्व सक्रिय है, वह कहां स्थित है और उससे कोशिकाओं के कार्य पर क्या असर पड़ता है।

आईवीएफ और आनुवंशिक विकास के बीच क्या संबंध है?

आईवीएफ प्रक्रिया में अंडाणु और शुक्राणु का निषेचन प्रयोगशाला में किया जाता है। इसके बाद विकसित भ्रूण को गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान भ्रूण को नियंत्रित प्रयोगशाला परिस्थितियों में विकसित होने का अवसर मिलता है।

वैज्ञानिक यह अध्ययन कर रहे हैं कि निषेचन, भ्रूण संवर्धन और शुरुआती विकास के दौरान होने वाले जैविक तथा आनुवंशिक नियमन में कोई अंतर दिखाई देता है या नहीं। विशेष रूप से, जीनों की अभिव्यक्ति और डीएनए के रासायनिक नियमन से जुड़ी प्रक्रियाएं अनुसंधान का महत्वपूर्ण विषय हैं।

यदि किसी अध्ययन में जंपिंग जीन्स की गतिविधि में अंतर पाया जाता है, तो यह समझना जरूरी है कि वह अंतर कितना बड़ा है, कितने बच्चों में देखा गया और क्या उसका वास्तविक स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव पड़ता है।

शोध में क्या सामने आया?

अक्टूबर 2026 में प्रकाशित अध्ययन अमेरिकन जर्नल ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी में आया है, न कि द लैंसेट में। इसमें 33 आईवीएफ से जन्मे बच्चों और 42 प्राकृतिक गर्भाधान से जन्मे बच्चों के नमूनों का अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने आईवीएफ समूह में LINE-1 नामक जंपिंग जीन्स की कुल मात्रा अपेक्षाकृत अधिक पाई। अध्ययन में जीनोम के कुछ स्थानों पर इन तत्वों के जुड़ने और हटने की आवृत्ति में भी अंतर मिला।

शोधकर्ताओं ने इन अलग-अलग स्थानों के आसपास ऐसे जीन भी पाए जो चयापचय, हृदय रोग, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों और कैंसर से जुड़े हैं। हालांकि, किसी रोग से जुड़े जीन के निकट जंपिंग जीन्स का पाया जाना यह साबित नहीं करता कि संबंधित बच्चे को भविष्य में वह बीमारी होगी।

क्या आईवीएफ से जन्मे बच्चों को अधिक खतरा है?

इस अध्ययन को शुरुआती वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में देखना चाहिए। नमूनों की संख्या सीमित थी और शोध में पहचाने गए आनुवंशिक अंतरों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य परिणाम अभी स्पष्ट नहीं हैं। अध्ययन यह भी सिद्ध नहीं करता कि आईवीएफ प्रक्रिया ही इन अंतरों का एकमात्र कारण है।

इसलिए इन निष्कर्षों के आधार पर आईवीएफ से जन्मे बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भय फैलाना उचित नहीं होगा। आईवीएफ एक स्थापित प्रजनन चिकित्सा पद्धति है, और इसके संभावित दीर्घकालिक प्रभावों को समझने के लिए व्यापक शोध आवश्यक है।

भविष्य में क्या होगा?

आगे बड़े समूहों पर अध्ययन, बच्चों के स्वास्थ्य की लंबे समय तक निगरानी और भ्रूण विकास के दौरान होने वाले जैविक बदलावों का विश्लेषण महत्वपूर्ण होगा। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि जंपिंग जीन्स में पाए गए अंतर अस्थायी हैं, सामान्य जैविक विविधता का हिस्सा हैं या किसी वास्तविक स्वास्थ्य जोखिम से जुड़े हैं।

शोध के निष्कर्षों के आधार पर भविष्य में भ्रूण संवर्धन की परिस्थितियों को बेहतर बनाने के उपाय भी तलाशे जा सकते हैं। लेकिन किसी नए चिकित्सकीय दिशानिर्देश को अपनाने से पहले स्वतंत्र शोध से परिणामों की पुष्टि जरूरी होगी।

निष्कर्ष

आईवीएफ से जन्मे बच्चों के जीनोम में LINE-1 जंपिंग जीन्स से जुड़े अंतर का पता चलना प्रजनन चिकित्सा के क्षेत्र में शोध की एक महत्वपूर्ण दिशा है। यह अध्ययन वैज्ञानिकों को भ्रूण विकास और आनुवंशिक नियमन के बीच संभावित संबंधों को समझने का अवसर देता है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन निष्कर्षों को सावधानी से समझा जाए। आईवीएफ से जन्मे बच्चों के लिए किसी विशेष बीमारी का खतरा निश्चित मानने का आधार अभी उपलब्ध नहीं है। बड़े और दीर्घकालिक अध्ययन ही यह स्पष्ट कर पाएंगे कि इन आनुवंशिक अंतरों का वास्तविक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है।