हिरासत में विपक्षी नेता, वामपंथी कार्यकर्ता और युवा आंदोलनकारी; जंतर-मंतर पर सुरक्षा सख्त
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजधानी दिल्ली में शनिवार को राजनीतिक तनाव बढ़ गया।
मुख्य बातें
- विपक्षी दलों के नेताओं पर भी पुलिस की कार्रवाई हुई। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी, पार्टी के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन तथा दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को हिरासत में लिए जाने की खबरें आईं।

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजधानी दिल्ली में शनिवार को राजनीतिक तनाव बढ़ गया। जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने कई स्थानों पर सुरक्षा कड़ी की तथा प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे नेताओं, कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों को हिरासत में लिया। भारतीय समाचार एजेंसी पीटीआई (भाषा) की रिपोर्ट के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कई प्रमुख नेताओं को दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरते ही हिरासत में ले लिया गया।
कौन-कौन हिरासत में लिया गया?
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके तथा नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने पर हिरासत में लिया गया। मीडिया रिपोर्टों में यूट्यूबर ध्रुव राठी और सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी गई है। हालांकि, इन सभी की बाद की स्थिति के बारे में अलग-अलग समय पर जारी खबरों में अंतर हो सकता है।
विपक्षी दलों के नेताओं पर भी पुलिस की कार्रवाई हुई। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी, पार्टी के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन तथा दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को हिरासत में लिए जाने की खबरें आईं। माकपा महासचिव एम.ए. बेबी, वरिष्ठ वामपंथी नेता वृंदा करात, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, सांसद जॉन ब्रिटास और अन्य वामपंथी नेताओं के साथ भी पुलिस कार्रवाई की खबरें सामने आईं।
प्रदर्शन कौन कर रहा है और मुख्य मांग क्या है?
प्रदर्शन में सीजेपी के कार्यकर्ताओं के अलावा आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी दलों से जुड़े नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लेने या प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने की कोशिश की। कुछ छात्र और युवा समूह भी आंदोलन से जुड़े बताए गए हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। उनका आरोप है कि एसआईआर के माध्यम से मतदाता सूचियों में बदलाव और नाम हटाने की प्रक्रिया से मताधिकार प्रभावित हो सकता है।
प्रदर्शन का विरोध कौन कर रहा है?
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति देने से इनकार किया। पुलिस का तर्क था कि पिछले प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और महिला पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाओं के आरोप सामने आए थे। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था, यातायात और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंध लगाए। पुलिस के अनुसार, निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद सुरक्षा घेरा तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश करने वालों को हिरासत में लिया गया।
केंद्र सरकार के पक्ष से केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने विपक्षी दलों को सलाह दी कि वे विरोध प्रदर्शन के बजाय उचित प्रक्रिया के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात करें और अपनी शिकायतें रखें। उनका कहना था कि बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान निकालना अधिक उपयोगी होगा।
निर्वाचन आयोग और भाजपा ने मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का पक्ष है कि एसआईआर मतदाता सूची के सत्यापन और सुधार की प्रक्रिया है। इस प्रकार, विवाद का केंद्र मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया, मताधिकार की सुरक्षा और विरोध प्रदर्शन की अनुमति का प्रश्न है।
दिल्ली में वर्तमान स्थिति
पीटीआई (भाषा) की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और अन्य लोगों को वापस लौटाया। इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए तथा नई दिल्ली क्षेत्र को सुरक्षा प्रबंधन के लिए 20 सेक्टरों में बांटा गया।
प्रदर्शन से जुड़े समाचारों में मेट्रो सेवाओं पर प्रतिबंध, यातायात मार्गों में बदलाव और अन्य सुरक्षा उपायों की भी जानकारी दी गई है। हालांकि, इन सभी प्रतिबंधों की वर्तमान स्थिति तथा हिरासत में लिए गए लोगों की अंतिम संख्या की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
निष्कर्ष: दिल्ली का यह घटनाक्रम चुनावी प्रक्रिया पर राजनीतिक मतभेद और विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर चल रही बहस को सामने लाता है। एक ओर विपक्षी दल और प्रदर्शनकारी मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं पुलिस कानून-व्यवस्था का हवाला दे रही है और सरकार के पक्ष से उचित प्रक्रिया अपनाने की बात कही जा रही है।