लद्दाख का आठवां जिला बना संकू: कारगिल से अलग हुआ नया जिला
लद्दाख प्रशासन ने आधिकारिक रूप से संकू को केंद्र शासित प्रदेश का आठवां जिला घोषित किया है। यह फैसला सुरू घाटी के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है।
मुख्य बातें
- प्रशासनिक बदलाव
- उपराज्यपाल का बयान
- विकास के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
- समर्थन और चिंताएं
- इस फैसले के खिलाफ क्या कहा जा सकता है?

लद्दाख प्रशासन ने आधिकारिक रूप से संकू को केंद्र शासित प्रदेश का आठवां जिला घोषित किया है। यह फैसला सुरू घाटी के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है। उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने इसे मंजूरी दी और राजस्व विभाग ने 16 अक्टूबर 2026 को अधिसूचना S.O. 284 जारी की।
प्रशासनिक बदलाव
नए जिले का मुख्यालय संकू होगा, जो कारगिल शहर से लगभग 42 किलोमीटर दूर है। नए जिले में चार तहसीलें—संकू, जीएम पोर, टीएसजी और तैसुरु—और उनसे जुड़े राजस्व गांव शामिल होंगे।
कारगिल जिले का क्षेत्राधिकार संशोधित कर दिया गया है। जो तहसीलें और राजस्व गांव अब संकू जिले में शामिल हुए हैं, वे कारगिल जिले से बाहर कर दिए गए हैं। इसी तरह लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (LAHDC), कारगिल का क्षेत्राधिकार भी बदला गया है। नई व्यवस्था के लिए परिषद चुनाव औपचारिक अधिसूचना के बाद होंगे।
उपराज्यपाल का बयान
उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने X पर लिखा, “माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और माननीय गृह मंत्री अमित शाह जी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के दृष्टिकोण के अनुरूप, मुझे संकू जिले के गठन की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है।”
उन्होंने कहा कि यह निर्णय क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है और इसमें अंजुमन-ए-साहिब जमां, LAHDC कारगिल के सीईसी डॉ. जाफर अखून, सांसद हनीफा जान सहित स्थानीय प्रतिनिधियों की भूमिका रही।
विकास के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
संकू उपजाऊ सुरू घाटी का केंद्रीय हब है। समर्थकों का कहना है कि जिला दर्जा मिलने से प्रशासन लोगों के करीब आएगा। राजस्व कार्य, भू-अभिलेख, प्रमाणपत्र, योजनाएं, आपदा प्रबंधन और स्थानीय शासन के लिए लोगों को कारगिल जाने की जरूरत कम होगी।
प्रशासन ने पांच नई तहसीलों के गठन की भी घोषणा की है, जिसे विकेंद्रीकृत प्रशासन और जमीनी लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम बताया गया है।
समर्थन और चिंताएं
LAHDC कारगिल के नेतृत्व और स्थानीय सामाजिक-धार्मिक संगठनों ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताया और कहा कि यह सुरू घाटी की आकांक्षाओं को मान्यता देता है।
लेकिन जिला बनने से असली लाभ तभी मिलेगा जब इसके साथ व्यावहारिक व्यवस्थाएं हों:
- कर्मचारी और बुनियादी ढांचा: नए जिले के लिए दफ्तर, कर्मचारी, रिकॉर्ड, कोर्ट, पुलिस और प्रशासनिक भवन जरूरी हैं।
- बजट: केवल सीमा बदलने से विकास नहीं होगा; पर्याप्त वित्तीय आवंटन जरूरी है।
- सेवाओं में निरंतरता: भू-अभिलेख, प्रमाणपत्र, राजस्व मामले और कल्याण योजनाएं बिना रुकावट चलनी चाहिए।
- अन्य मांगें: शाकर, चिकतान और शरगोले को जिला बनाने की पुरानी मांगें भी हैं; स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ सकता है कि अन्य क्षेत्रों को कब और कैसे न्याय मिलेगा।
- राजनीतिक संदर्भ: यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब लद्दाख के नेताओं और केंद्रीय गृह मंत्रालय के बीच संवैधानिक सुरक्षा और केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय निर्वाचित निकाय पर बातचीत अनिर्णीत रही थी।
इस फैसले के खिलाफ क्या कहा जा सकता है?
उपलब्ध रिपोर्टिंग में यह नहीं कहा गया है कि निर्णय कानूनी रूप से अवैध है; यह राजस्व विभाग की औपचारिक अधिसूचना से जारी हुआ है। लेकिन आलोचक यह कह सकते हैं कि अधिसूचना केवल पहला कदम है—असली परीक्षा कर्मचारियों, बजट, इंफ्रास्ट्रक्चर, LAHDC चुनाव और जनसेवाओं की समयबद्ध व्यवस्था से होगी।
बड़ा सवाल यह भी है कि नया जिला स्थानीय प्रशासन तो बेहतर कर सकता है, लेकिन लद्दाख में संवैधानिक सुरक्षा, रोजगार, भूमि सुरक्षा और अधिक लोकतांत्रिक अधिकारों की बड़ी मांगों का समाधान अपने आप नहीं होगा।
(श्रेय : risingkashmir, newindianexpress, greaterkashmir, hindustantimes, manoramayearbook, ladakh.gov,)