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‘अब बताओ, डिसेबिलिटी किसमें है?’: दिल्ली मेट्रो के लिफ्ट वीडियो ने छेड़ी बड़ी बहस

दिल्ली मेट्रो स्टेशन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में व्हीलचेयर पर बैठे एक युवक को लिफ्ट के बाहर इंतजार करना पड़ता है, जबकि आसपास के यात्री तेजी से लिफ्ट में घुस जाते हैं।

मुख्य बातें

  • वीडियो में क्या दिखा?
  • ‘अब बताओ, डिसेबिलिटी किसमें है?’
  • लोगों की राय
  • दिल्ली मेट्रो के लिए सुझाव
  • बड़ा संदेश
Disabled person could not take the lift
Disabled person could not take the lift · Geminai AI

दिल्ली मेट्रो स्टेशन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में व्हीलचेयर पर बैठे एक युवक को लिफ्ट के बाहर इंतजार करना पड़ता है, जबकि आसपास के यात्री तेजी से लिफ्ट में घुस जाते हैं। यह वीडियो दिल्ली के कंटेंट क्रिएटर तेज बेनीवाल ने शेयर किया।

वीडियो में क्या दिखा?

वीडियो में तेज बेनीवाल अपनी व्हीलचेयर पर लिफ्ट के सामने खड़े दिखते हैं। लिफ्ट का दरवाजा खुलते ही कई यात्री अंदर घुस जाते हैं और जगह भर देते हैं। नतीजतन, व्हीलचेयर वाले युवक को लिफ्ट में घुसने के लिए जगह नहीं मिलती और उन्हें अगली लिफ्ट का इंतजार करना पड़ता है।

लिफ्ट के पास लगे बोर्ड पर साफ लिखा है कि दिव्यांग और बुजुर्ग यात्रियों को प्राथमिकता दी जाए। इसीलिए बहस यह नहीं है कि मेट्रो में सुविधा है या नहीं, बल्कि यह है कि लोग उस सुविधा का सम्मान करते हैं या नहीं।

‘अब बताओ, डिसेबिलिटी किसमें है?’

वीडियो शेयर करते हुए तेज बेनीवाल ने लिखा, “अब बताओ, डिसेबिलिटी किसमें है?” इस पंक्ति ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। उनका संदेश था कि उस पल असली असमर्थता शारीरिक नहीं, बल्कि सहानुभूति और नागरिक संवेदनशीलता की कमी थी।

लोगों की राय

समर्थन करने वालों ने कहा कि यह घटना सिविक सेंस की कमी दिखाती है। उनका तर्क है कि अगर लोग व्हीलचेयर यात्रियों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को पहले जाने नहीं देंगे, तो “प्राथमिकता” वाले बोर्ड केवल कागजी निर्देश बने रहेंगे ।

दूसरा पक्ष यह कहता है कि पीक आवर में मेट्रो स्टेशनों पर भीड़ एक बड़ी समस्या है। लोग ट्रेन छूटने की चिंता में होते हैं, लिफ्ट की क्षमता सीमित होती है और कई बार स्टाफ की निगरानी भी नहीं होती। इससे व्यवहार का बचाव नहीं होता, लेकिन समाधान केवल नैतिक शिक्षा से नहीं, बल्कि बेहतर व्यवस्था से भी आना चाहिए।

तीसरा पक्ष यह कहता है कि छोटे वीडियो से किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से बदनाम करना उचित नहीं हो सकता। यह संभव है कि कुछ लोगों को व्हीलचेयर यात्री का इंतजार करना समझ में नहीं आया हो। फिर भी, बड़ा संदेश यही है कि दिव्यांग यात्रियों को प्राथमिकता देना अपवाद नहीं, बल्कि सामान्य व्यवहार होना चाहिए।

दिल्ली मेट्रो के लिए सुझाव

  • लिफ्ट के बाहर साफ “प्रायोरिटी बोर्डिंग” जोन बनाए जाएं।
  • पीक आवर में स्टेशन स्टाफ कतार नियंत्रित करे और व्हीलचेयर यात्रियों को पहले जाने दे।
  • घोषणा हो: “कृपया व्हीलचेयर यात्रियों, दिव्यांग और बुजुर्ग यात्रियों को पहले चढ़ने दें।”
  • भीड़ वाले स्टेशनों पर लिफ्ट की क्षमता बढ़ाई जाए या वैकल्पिक सुगम मार्ग उपलब्ध कराए जाएं।
  • नियमित जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि सुगम्यता केवल नियम नहीं बल्कि आदत बने।

बड़ा संदेश

दिल्ली मेट्रो में लिफ्ट, रैंप और प्राथमिकता बोर्ड मौजूद हैं, लेकिन असली सुगम्यता तभी बनती है जब नागरिक उनका सम्मान करें। यह वीडियो याद दिलाता है कि शहर को सुगम बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और इंसानी संवेदनशीलता—दोनों जरूरी हैं।

(श्रेय:- newsable.asianetnews+1, newsx)