जिबूती तट के पास प्रवासियों की नाव पलटी, 139 लोगों की मौत से मचा हड़कंप
जिबूती, 12 अक्टूबर 2026। पूर्वी अफ्रीका के देश जिबूती के तट के पास प्रवासियों को ले जा रही एक अत्यधिक भरी नाव के पलटने से कम से कम 139 लोगों की मौत होने की खबर है।
मुख्य बातें
- ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, नाव में 305 लोग सवार थे, कम से कम 139 की मौत हुई ।
- 84 लोग लापता थे और लगभग 82 लोग बचाए गए थे।
- मृतकों में कम से कम 15 बच्चे शामिल हैं।
- नाव जिबूती से यमन जा रही थी और 8–9 अक्टूबर की रात गुहेरे के पास पलटी।

जिबूती, 12 अक्टूबर 2026। पूर्वी अफ्रीका के देश जिबूती के तट के पास प्रवासियों को ले जा रही एक अत्यधिक भरी नाव के पलटने से कम से कम 139 लोगों की मौत होने की खबर है। इस दर्दनाक हादसे में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों सहित बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई। यह दुर्घटना एक बार फिर उन खतरनाक समुद्री मार्गों की भयावह स्थिति को सामने लाती है, जिनका इस्तेमाल हजारों प्रवासी बेहतर जीवन, रोजगार और सुरक्षित भविष्य की तलाश में करते हैं।
खतरनाक यात्रा बनी मौत का रास्ता
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, नाव में क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने के कारण यात्रा बेहद जोखिमपूर्ण थी। समुद्र में नाव पलटने के बाद यात्रियों को बचाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हादसे के बाद बचाव अभियान और लापता लोगों की तलाश को लेकर स्थिति पर नजर रखी जा रही है। मृतकों की पहचान और दुर्घटना के सटीक कारणों की पुष्टि के लिए आधिकारिक जानकारी आवश्यक है।
बेहतर भविष्य की तलाश में जोखिम
जिबूती अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण प्रवासी मार्ग पर पड़ता है। इस क्षेत्र से अनेक लोग रोजगार और बेहतर आर्थिक अवसरों की तलाश में समुद्री यात्रा करते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की होती है, जो गरीबी, बेरोजगारी, संघर्ष और असुरक्षा से बचने के लिए अपना घर छोड़ने को मजबूर होते हैं।
मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल
इस तरह की दुर्घटनाएँ प्रवासियों की सुरक्षा, मानव तस्करी और अवैध परिवहन के खतरों को उजागर करती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सुरक्षित प्रवासन के विकल्प, तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई और प्रभावी बचाव व्यवस्था को मजबूत करना आवश्यक है।
आगे की चुनौती
139 लोगों की मौत की खबर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक गंभीर मानवीय चुनौती रखती है। प्रवासियों को सुरक्षित रास्ते उपलब्ध कराना और समुद्र में उनकी जान बचाने के लिए समन्वित प्रयास करना अब पहले से अधिक जरूरी हो गया है।