सलमान खान का ‘सोनम, इट्स डन ब्रो’ मीम वायरल: सोशल मीडिया पर छाए भाईजान, बिग बॉस की मेजबानी भी चर्चा में
सोनम वांगचुक से सलमान खान की अपील ने पकड़ा इंटरनेट पर जोर; गंभीर सामाजिक मुद्दे से निकला एक वाक्य बना मीम संस्कृति का हिस्सा।

नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान का वाक्य “सोनम, इट्स डन ब्रो” सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हुआ और देखते ही देखते मीम बनाने वालों के लिए नया विषय बन गया। यह टिप्पणी लद्दाख के शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से जुड़ी थी, जो विद्यार्थियों के विरोध-प्रदर्शन के समर्थन में भूख हड़ताल कर रहे थे। सलमान ने उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की थी।
कैसे वायरल हुआ यह वाक्य?
जुलाई 2026 में सलमान खान ने सोशल मीडिया पर सोनम वांगचुक से अनशन आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने विद्यार्थियों के भविष्य और परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उनके संदेश में इस्तेमाल हुआ सहज और दोस्ताना संबोधन—“ब्रो”—लोगों को खासा दिलचस्प लगा।
इसके बाद इंटरनेट पर मीम्स की बाढ़ आ गई। उपयोगकर्ताओं ने इस वाक्य को बॉलीवुड संवादों, हास्यपूर्ण तस्वीरों और राजनीतिक घटनाओं से जोड़कर साझा किया। कई पोस्ट में मजाकिया अंदाज में यह संकेत दिया गया कि सलमान की अपील के बाद घटनाक्रम ने तेजी पकड़ ली। हालांकि, किसी आंदोलन के समाप्त होने या किसी निर्णय के पीछे केवल एक व्यक्ति के संदेश को कारण मानना उचित नहीं होगा।
सोनम वांगचुक की प्रतिक्रिया
अगस्त 2026 में वांगचुक ने भी सलमान की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने विद्यार्थियों के समर्थन में आवाज उठाने के लिए अभिनेता के प्रति सम्मान जताया और कहा कि हर व्यक्ति की अपनी मजबूरियां होती हैं। उनकी प्रतिक्रिया ने इस वायरल बातचीत को एक बार फिर चर्चा में ला दिया।
बिग बॉस की मेजबानी भी सुर्खियों में
सलमान खान की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण उनका रियलिटी शो ‘बिग बॉस’ भी है। शो के नए सीजन, सप्ताहांत के एपिसोड और मेजबान के रूप में उनकी टिप्पणियों को लेकर दर्शकों के बीच लगातार चर्चा रहती है। हालांकि, ‘सोनम, इट्स डन ब्रो’ मीम और बिग बॉस की मेजबानी दो अलग-अलग विषय हैं; दोनों को जोड़कर किसी अपुष्ट कार्यक्रम-संबंधी बदलाव का दावा नहीं किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
यह वायरल वाक्य दिखाता है कि सोशल मीडिया पर गंभीर घटनाओं से जुड़ी टिप्पणियां भी हास्य और मीम संस्कृति का हिस्सा बन सकती हैं। लेकिन मनोरंजन के बीच मूल मुद्दे—विद्यार्थियों की चिंताएं, परीक्षा व्यवस्था और सामाजिक संवाद—को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।