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‘जंतर मंतर चलो’ गेम वायरल: पुलिस बैरिकेड से धरने तक, दिल्ली प्रदर्शन अब वीडियो गेम बन गया

दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शन और गिरफ्तारियों के बीच एक नया वीडियो गेम ‘जंतर मंतर चलो’ सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है।

an online game on protest in Jantar Mantar
an online game on protest in Jantar Mantar · Gemini Ai

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शन और गिरफ्तारियों के बीच एक नया वीडियो गेम ‘जंतर मंतर चलो’ सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। इस सैटायरिकल 3D गेम में खिलाड़ी बैरिकेड के दोनों तरफ खेल सकते हैं—या तो प्रदर्शनकारी बनकर जंतर मंतर पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं, या दिल्ली पुलिस की भूमिका निभाकर भीड़ को रोक सकते हैं।

यह गेम बरेली के 27 वर्षीय DevOps इंजीनियर सूरज कुशवाहा ने बनाया है। गेम mantarjantar.com पर बिना डाउनलोड और बिना लॉगिन के ब्राउज़र पर खेला जा सकता है।

गेम कैसे खेला जाता है?

‘जंतर मंतर चलो’ में खिलाड़ी के पास दो विकल्प हैं—प्रदर्शनकारी (andolankari) या दिल्ली पुलिस। प्रदर्शनकारी की भूमिका में खिलाड़ी को बैरिकेड, पुलिस और अन्य बाधाओं से बचते हुए जंतर मंतर तक पहुंचना होता है।

प्रदर्शनकारी मोड में खिलाड़ी को एक बड़ा काफिला बनाना, बैरिकेड पार करना और जंतर मंतर के केंद्र में जितना संभव हो सके लंबा धरना देना होता है। इस दौरान पुलिस से बचना और हिरासत से बचना मुख्य चुनौती है।

दूसरी ओर, पुलिस की भूमिका में खिलाड़ी को भीड़ को रोकना, बैरिकेडिंग बनाए रखना और प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर तक पहुंचने से रोकना होता है। इससे गेम दोनों पक्षों के नजरिए को दिखाने की कोशिश करता है।

किसने और क्यों बनाया?

यह गेम सूरज कुशवाहा ने बनाया है, जो बरेली के एक DevOps इंजीनियर हैं और oneplay.in में काम करते हैं। इंटरनेट पर वे @bugswriter नाम से जाने जाते हैं।indianexpress+1

कुशवाहा ने बताया कि उन्होंने हाल की “जंतर मंतर 2.0” की अपीलों और दिल्ली में प्रदर्शन-गिरफ्तारी की खबरों को देखकर यह गेम बनाने का विचार लिया। उनका मकसद एक 3D गेम बनाना था, जिसमें खिलाड़ी पुलिस से बचते हुए प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने की कोशिश कर सकें।theprint

रिपोर्ट्स के अनुसार, कुशवाहा ने इस गेम को दो रातें बिना सोए बनाया। उन्होंने खुद स्वीकार किया कि वे अनुभवी गेम डिजाइनर नहीं हैं, लेकिन AI सॉफ्टवेयर की मदद से इस प्रोजेक्ट को जल्दी तैयार कर लिया।theprint+1

वायरल होने की कहानी

कुशवाहा ने गेम के बारे में एक रील इंस्टाग्राम पर शेयर की, जो जल्दी वायरल हो गई। इसके बाद कई इन्फ्लुएंसर्स ने भी गेम को शेयर किया, जिससे इसकी पहुंच और बढ़ गई।

गेम का नाम और कॉन्सेप्ट इतने असरदार थे कि लोगों ने इसे “प्रोटेस्ट बिना डिटेंशन” और “सैटायरिकल प्रोटेस्ट गेम” जैसे शब्दों के साथ शेयर करना शुरू कर दिया। कई यूजर्स ने इसे दिल्ली के हालिया प्रदर्शनों पर एक मजाकिया लेकिन तीखी टिप्पणी बताया।

मुख्य बातें

  • गेम का नाम: जंतर मंतर चलो (Jantar Mantar Chalo)।
  • निर्माता: सूरज कुशवाहा, 27 वर्षीय DevOps इंजीनियर, बरेली।
  • गेम टाइप: 3D सैटायरिकल ब्राउज़र गेम, वेब और मोबाइल पर खेला जा सकता है।theprint+1
  • खेलने का तरीका: mantarjantar.com पर बिना डाउनलोड और बिना लॉगिन।hindi.gadgets360+1
  • दो रोल: प्रदर्शनकारी या दिल्ली पुलिस।
  • प्रदर्शनकारी का लक्ष्य: बैरिकेड पार कर जंतर मंतर पहुंचना और धरना देना।
  • पुलिस का लक्ष्य: भीड़ को रोकना और प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से बचाना।
  • वायरल होने का कारण: दिल्ली के हालिया प्रदर्शनों, गिरफ्तारियों और सोशल मीडिया रील्स पर चर्चा।

गेम में क्या-क्या है?

गेम में प्रदर्शनकारियों के लिए कई बाधाएं हैं—पुलिस के डंडे, आंसू गैस, बैरिकेड और हिरासत का खतरा। खिलाड़ी को इन सबसे बचते हुए भीड़ बनाए रखनी होती है और जंतर मंतर के केंद्र तक पहुंचना होता है।theprint

पुलिस की भूमिका में खिलाड़ी को रणनीतिक तरीके से बैरिकेड लगाना और भीड़ को फैलने से रोकना होता है। इससे गेम सिर्फ एक तरफा प्रदर्शन नहीं, बल्कि दोनों तरफ की चुनौतियों को दिखाता है।indianexpress+1

कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि गेम में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को “तप्पी” देने जैसे सैटायरिकल एलिमेंट्स भी हैं, हालांकि यह दावा मुख्यधारा की रिपोर्टिंग में पूरी तरह सत्यापित नहीं है।

विश्लेषण: गेम क्यों वायरल हुआ?

यह गेम इसलिए वायरल हुआ क्योंकि यह एक वास्तविक राजनीतिक मुद्दे को मजाक और गेमिंग के जरिए दिखाता है। जंतर मंतर पर प्रदर्शन, बैरिकेडिंग, पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी—ये सब अभी देश की बहस का हिस्सा हैं, और गेम ने इन्हें एक ऐसे रूप में पेश किया जो युवाओं को तुरंत पसंद आया।

यह भी दिखाता है कि आज के युवा राजनीतिक टिप्पणी के लिए सिर्फ पोस्टर, नारा या वीडियो नहीं, बल्कि इंटरैक्टिव गेम जैसे नए माध्यम इस्तेमाल कर रहे हैं। AI टूल्स की मदद से एक व्यक्ति भी दो रातों में ऐसा गेम बना सकता है जो लाखों लोगों तक पहुंच जाए।

लेकिन यह गेम विवाद का विषय भी बन सकता है। पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन को गेम के रूप में दिखाना कुछ लोगों को मजाकिया लगेगा, जबकि कुछ इसे संवेदनशील मुद्दे का मजाक उड़ाना मान सकते हैं।

जांच और सवाल

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि गेम में दिखाए गए कुछ सीन—जैसे आंसू गैस, लाठीचार्ज या हिरासत—कितने हद तक वास्तविक घटनाओं पर आधारित हैं और कितने सिर्फ सैटायरिकल एडिशन हैं। निर्माता ने इसे मनोरंजन और पैरोडी बताया है, लेकिन इसकी राजनीतिक संदेशना पर बहस जारी है।

यह भी देखना होगा कि गेम कितने दिन वायरल रहता है और क्या इस पर कोई कानूनी या प्लेटफॉर्म-स्तरीय कार्रवाई होती है। अभी तक किसी आधिकारिक बयान या गेम पर रोक की पुष्टि नहीं हुई है।

आगे क्या होगा?

अगर गेम की लोकप्रियता इसी तरह बढ़ती रही, तो इसके और वर्जन, नए लेवल या मल्टीप्लेयर मोड आने की संभावना है। कुछ रिपोर्ट्स में पहले ही बताया गया है कि गेम ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में खेला जा सकता है।

यह घटना यह भी दिखाती है कि भविष्य में राजनीतिक सैटायर के लिए गेमिंग एक बड़ा माध्यम बन सकता है। युवा डेवलपर्स AI और वेब टेक्नोलॉजी की मदद से ऐसे गेम बना सकते हैं, जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि सामाजिक टिप्पणी भी हों।

निष्कर्ष

‘जंतर मंतर चलो’ सिर्फ एक वीडियो गेम नहीं, बल्कि दिल्ली के हालिया प्रदर्शनों पर युवाओं की एक सैटायरिकल प्रतिक्रिया है। यह दिखाता है कि राजनीतिक बहस अब सड़क और सोशल मीडिया के साथ-साथ गेमिंग की दुनिया में भी पहुंच रही है।

गेम की सफलता यह भी बताती है कि एक छोटा विचार, अगर समय और मुद्दे से जुड़ा हो, तो कितनी तेजी से वायरल हो सकता है। लेकिन इसके साथ यह सवाल भी खड़ा होता है कि क्या गेमिंग राजनीतिक संवाद का नया रूप बनेगी, या सिर्फ एक वायरल ट्रेंड रह जाएगी।

(श्रेय:indianexpress, theprint,hindi.gadgets360,indianexpress, edtimes, oneindia,