तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत “ 13 अगस्त को

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दिनेश शर्मा “अधिकारी”।
इस बार “डोर स्टेप काउंसलिंग “ का विशेष अभियान पहली बार
“ चैक अनादरण और बैंक रिकवरी “ के 10 लाख तक राशी के मुकदमे भी होंगे शामिल ।

झुंझनू। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार झुंझुनूं न्यायक्षेत्र में दिनांक 13 अगस्त 22 को ” तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत “ का आयोजन कोविड-19 को दृष्टिगत रखते हुए ऑनलाईन व ऑफलाईन दोनो माध्यमों से किया जावेगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव श्रीमती दीक्षा सूद ने राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता हेतु विशेष कार्ययोजना तैयार हो रही है जिससे अदालतों में दिन – प्रतिदिन बढ़ते प्रकरणों की संख्या को आपसी सहमति और भाई चारे की भावना को दृष्टिगत रखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पहली बार 10 लाख तक की चैक की राशि के लम्बित प्रकरण जिनमें 138 एन.आई एक्ट के प्रकरणों तथा बैंक रिकवरी के सिविल मामलों(सिविल वाद, सिविल इजराय एवं आर्बिट्रेशन अवॉर्ड इजराय) हो में प्री- काउंसलिंग एवं डोर-स्टेप काउंसलिंग करवाने का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें 04 से 08. जुलाई.2022 तक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय तथा तालुका विधिक सेवा समिति में कुशल प्री-काउंसलर द्वारा काउंसलिंग की जावेगी। इस संबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा समय-सारणी बनाकर यथासम्भव प्रत्येक कैम्प में न्यूनतम 100 प्रकरण रखकर प्री-काउंसलिंग करवायी जावेगी। आमजन से अपील की जाती है कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में अपने लम्बित प्रकरणों को आपसी समझौते से प्रकरण निस्तारित करवा सकते है।

इस राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रि-लिटिगेशन में एन.आई. एक्ट के प्रकरण, धन वसूली के प्रकरण, श्रम विवाद एवं नियोजन संबंधी विवादों के प्रकरण, बिजली, पानी व अन्य भुगतान से संबंधित प्रकरण, भरण-पोषण से संबंधित प्रकरण इसके अतिरिक्त न्यायालयों में लंबित प्रकरणों में दाण्डिक शमनीय प्रकरण, एन.आई. एक्ट के प्रकरण, धन वसूली के प्रकरण, एम.ए.सी.टी. के प्रकरण, श्रम एवं नियोजन संबंधी विवादों के प्रकरण, बिजली, पानी एवं अन्य बिल भुगतान से संबंधित प्रकरण, वैवाहिक विवाद(तलाक के मामलों को छोड़कर), भूमि अधिग्रहण से संबंधित प्रकरण, तथा अन्य सिविल प्रकरणों को राजीनामे से निस्तारण हेतु पेश किया जा सकेगा। चिन्हित प्रकरणों में लोक अदालत से पूर्व ऑनलाईन प्री-काउंसलिंग भी करवाई जाएगी। न्यायाधीश श्रीमती सूद ने बताया कि बैंक व वित्तीय संस्थाएं ऐसे प्रकरणों को प्री-लिटिगेशन स्तर पर दर्ज करावाना चाहते हैं, तो उनकी सूची समय रहते जिला विधिक सेवा प्राधिकरण या तालुका स्तर पर विधिक सेवा समितियों में प्रस्तुत कर सकेंगे, जिससे नोटिस जारी कर अविलम्ब निस्तारण के लिए प्रभावी कार्रवाई हो सके। अगर लोक अदालत में प्रकरण निस्तारित हो जाता है तो प्रकरण का अंतिम रूप से निस्तारण हो जायेगा तथा न्यायालय में जमा करवायी गयी फीस भी वापिस मिलेगी। न्यायाधीश श्रीमती सूद ने कहा कि सभी से अपील की जाती है कि जिनके भी प्रकरण उक्त विषयों से संबंधित लंबित है तो वे लोक अदालत की भावना से अपने प्रकरण में समझाईश के माध्यम से निस्तारित करवा सकते है ताकि न्यायालयों में चलने वाली कार्यवाहियों से बचा जा सके, तुरन्त सस्ता,सुलभ और मौके पर त्वरित न्याय अंतिम निर्णय के रूप में प्राप्त हो सके। लोक अदालत में अदालत में निर्णय निर्णयों की आगे अपील नहीं हो सकती लिहाजा यह अंतिम निर्णय होता है जिसमें मैं कोई जीतता है और ना ही कोई हारता है। दोनों ही पक्षकार खुशी खुशी समझोता करके लेन देन के प्रकरण से संबंधित अन्य कई छोटे मोटे मुकदमे भी मौके पर ही समाप्त हो जाएंगे।


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