आत्मघाती तब्लीग़ी जमात से संकट में देश

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विकास सक्सेना

कोरोना महामारी से बचाव के प्रयासों को तब्लीगी जमात के आत्मघाती कदम से भारी क्षति पहुंची है। जमातियों ने चिकित्सकों और मेडिकल कर्मचारियों के साथ अमानवीय तथा अश्लील व्यवहार करके पूरी मानवता को शर्मसार किया है। इसके बावजूद एक वर्ग इनका बचाव करने के लिए कुतर्क गढ़ रहा है। लोगों से मस्जिदों में इकट्ठा होने की अपील करने वाला जो मौलाना मुसलमानों से कह रहा था कि मरने के लिए सबसे अच्छी जगह मस्जिद है, वह खुद पुलिस कार्रवाई के डर से छिपा बैठा है। जमातियों की करतूतों को देखकर एक बड़े वर्ग को यह विश्वास हो गया है कि देश में कोरोना महामारी को फैलाने के लिए सोची-समझी साजिश के तहत यह किया गया।

सम्पूर्ण मानवजाति के अस्तित्व के लिए चुनौती बन चुके कोरोना वायरस का जन्म चीन में हुआ। इटली और स्पेन में पल बढ़कर यह अमरीका में जवान हुआ और भारत तक पहुंच गया। शुरुआत में एक वर्ग में इसे लेकर तरह-तरह की अफवाह उड़ायी गयी। इससे जुड़ी भ्रांतियां फैलाने के लिए वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में वायरल किए गए। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में चल रहे शाहीन बाग सरीखे आंदोलनों को बनाए रखने के लिए इसका जमकर इस्तेमाल किया गया। लेकिन इन आंदोलनों को अंततः सख्ती से खत्म कराया गया। हैरानी की बात यह है कि इन भ्रांतियों के बीच लोग यह भी समझने को तैयार नहीं थे कि इस्लामिक राष्ट्रों पाकिस्तान, ईरान और सउदी अरब में कोरोना का लगातार फैलाव हो रहा है। मक्का और मदीना के बंद हो जाने के बावजूद भारत में ये अपनी मस्जिदों को ’’आबाद‘‘ रखने की खुदकश जिद पर अड़े रहे। खासी मशक्कत के बाद पुलिस और प्रशासन ने इन लोगों को घरों के भीतर भेजा।

तब्लीगी जमात के कार्यक्रम का मामला पहली बार 30 मार्च को जब मीडिया की सुर्खियां बना तो लगा कि जमात के लोग इस वायरस के संक्रमण की गंभीरता को शायद समझ नहीं सके इसीलिए उन्होंने अपना कार्यक्रम स्थगित नहीं किया। इसके बाद कुछ जमाती लॉकडाउन होने के कारण निजामुद्दीन मरकज में फंस गए। पुलिस और प्रशासन को इसकी सूचना न देने के भी कारण समझ में आते हैं कि जमात के कार्यक्रम में शामिल होने वाले विदेशी पर्यटक वीजा पर भारत आते हैं। कानूनन ये लोग किसी तरह का धार्मिक प्रचार नहीं कर सकते हैं। लेकिन जमात का तो मुख्य काम ही लोगों के बीच इस्लाम का प्रचार-प्रसार करना है। इसलिए विदेशों से आए हुए जमाती पूरे देश की मस्जिदों में फैल जाते हैं और वहां अपने तरीके के इस्लाम का प्रचार करते हैं। इस्लाम के प्रचार में जुटे टूरिस्ट वीजा पर भारत भ्रमण पर आए जमातियों को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं दी गई।

शुरुआती दौर में एक बड़े वर्ग, जिसमें हिन्दू और मुसलमान दोनों शामिल थे उनका मानना था कि तब्लीगी जमात के निजामुद्दीन मरकज में लोग अनजाने या भूलवश फंस गए थे। लेकिन जमात से जुड़े लोगों की करतूतें मीडिया के जरिए जिस तरह लोगों के सामने आ रही हैं उससे विश्वास होने लगा है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को सामुदायिक स्तर पर फैलाने के लिए सोची-समझी साजिश के तहत तब्लीगी जमात ने लोगों को संक्रमित कर देश के विभिन्न हिस्सों में छिपा दिया। भारी मशक्कत के बाद इन लोगों को ढूंढकर निकाला गया। एकांतवास में रखे गए संदिग्ध और उपचार के लिए अस्पतालों में भर्ती कराए गए जमातियों की हरकतें मानवता को शर्मसार करने वाली हैं। ये लोग सुरक्षाकर्मियों, चिकित्सकों और दूसरे कर्मचारियों को संक्रमित करने के लिए उनके ऊपर तथा खुले में लगातार थूक रहे हैं, उनके सामने जानबूझकर जोर-जोर से खांस रहे हैं। इसके अलावा बेशर्मी से महिला नर्सों और चिकित्सकों के सामने अश्लील हरकतें कर रहे हैं। इन लोगों की अमानवीय करतूतों से परेशान उत्तर प्रदेश सरकार ने फैसला किया है कि जमातियों के उपचार एवं देखभाल में महिला चिकित्सकों और नर्सों की ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी। सरकार के इस फैसले की मानवीय आधार पर कुछ लोग आलोचना भी कर सकते हैं लेकिन उन्हें समझना होगा कि मारपीट और अश्लीलता करके मानवता को शर्मसार करने वाले मानवाधिकार के पात्र नहीं हो सकते।

सरकार के हर कदम का विरोध करने और उसकी हर कोशिश को किसी भी कीमत पर नाकाम करने की जुगत में लगे रहने वाला एक वर्ग तब्लीगी जमात और उसके मुखिया मौलाना साद की पैरोकारी में उतर आया है। पहले तो वे निजामुद्दीन मरकज में प्रतिबंध के बावजूद हजारों लोगों की भीड़ जुटने को गलत मानने को भी तैयार नहीं थे। लेकिन अब दबी जुबान में इसे अनजाने में हुई गलती स्वीकार करने लगे हैं। लेकिन इन लोगों के पास इस बात का जवाब नहीं है कि जब तेलंगाना में जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए छह लोगों की मौत के बाद साफ हो गया था कि इसमें शामिल हुए लोगों में कोरोना वायरस का संक्रमण फैल चुका है तो तब्लीगी जमात के प्रबंधकों ने कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों के नाम, पते और मोबाइल नम्बर या दूसरे कान्टैक्ट नम्बर प्रशासन को उपलब्ध क्यों नहीं कराए? इस तरह कार्यक्रम में शामिल लोगों को क्वारंटीन करके कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका को रोका जा सकता था। इसके अलावा मौलाना साद को अपने अनुयायियों से कहना चाहिए कि वे स्वयं प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क करें। इसके उलट जमाती न सिर्फ छिप गए बल्कि उन्होंने जांच का भी विरोध किया।

कोरोना वायरस के खिलाफ महायुद्ध में बेहतर स्थिति में पहुंच रहे भारत को तब्लीगी जमात के लोगों की करतूतों ने बड़े संघर्ष की तरफ धकेल दिया है। मौलाना साद के हिमायती तब्लीग़ी जमात की आलोचना को मुसलमानों के खिलाफ साजिश की तरह पेश कर रहे हैं ताकि वे मुसलमानों की हमदर्दी की आड़ में छिपकर खुद को सुरक्षित कर सकें। लेकिन हकीकत यह है कि जमातियों की करतूतों का सबसे बड़ा नुकसान आम मुसलमानों को ही उठाना पड़ा है। निजामुद्दीन मरकज से संक्रमित होकर देशभर की मस्जिदों में पहुंचे जमातियों ने आम मुसलमानों को कोरोना संक्रमित करके उनके जीवन को संकट में डाला है। इसके अलावा महिला कर्मचारियों से अश्लील हरकत करके उन्होंने देश-दुनिया के सामने जो तस्वीर पेश की है वो हर मुसलमान के लिए शर्मसार करने वाली हैं। इसलिए मुसलमान भी खुलकर इनके खिलाफ बोलने लगे हैं।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)


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