सरायइनायत प्रकरण पर केशव व कमिश्नर के कृत्य से योगी की छवि प्रभावित

प्रयागराज के अधिकारी व मंत्री लगा रहे योगी के अभियान को पलीता

सौरभ सिंह सोमवंशी

सराय इनायत प्रकरण पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य प्रयागराज के कमिश्नर जिला अधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्न चिन्ह

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार अपनी कार्यप्रणाली के लिए प्रदेश ही नहीं पूरे देश में अपना अलग स्थान बनाए हुए हैं उनकी चर्चा पूरे देश में नरेंद्र मोदी के बाद भारत के भविष्य के नेताओं में की जाने लगी है। हिंदी भाषी प्रदेशों के साथ-साथ अन्य प्रदेशों में भी चुनाव प्रचार के दौरान लगातार उनकी मांग होती रही है यहां तक कि जिन प्रदेशों में हिंदी नहीं बोली जाती वहां पर भी उनकी बड़ी मांग रहती है, उसका सिर्फ और सिर्फ एक कारण है उनकी कार्यप्रणाली। परंतु उनकी ही सरकार के कैबिनेट के कुछ उनके सहयोगी हैं और कुछ अधिकारी जो लगातार उनके अभियान को पलीता लगा रहे हैं।इस श्रेणी में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या भी शामिल हो गए हैं उनका एक बयान लगातार चर्चित रहा है जिसमें उन्होंने हमें पत्रकारिता छोड़कर नेतागिरी करने की नसीहत दी थी हालांकि यह वीडियो 10 अगस्त का था परंतु यह 28 अगस्त को सोशल मीडिया के साथ-साथ कई राष्ट्रीय चैनलों पर वायरल हुआ जिसमें उपमुख्यमंत्री ने हमें पत्रकारिता छोड़कर नेतागिरी करने की नसीहत दी थी क्योंकि मामला बहुत संवेदनशील था 17 जुलाई को प्रयागराज के सराय इनायत थाने में थाना अध्यक्ष संजय द्विवेदी आकाश कुमार राय और कौशलेंद्र द्विवेदी के साथ-साथ अन्य सिपाहियों के द्वारा एक 8 माह की गर्भवती महिला और दो पत्रकारों को जमकर पीटा गया था और उसी दिन शाम को प्रयागराज के सोशल मीडिया सेल के द्वारा यह प्रचारित किया गया कि दोनों पत्रकारों ने आपस में मारपीट की थी। पत्रकारोंं का आरोप है कि
फूलपुर के क्षेत्राधिकारी ने जांच के दौरान उन लोगों का बयान तक नहीं दर्ज किया जो लोग मौके पर उपस्थित थे। पुलिस के बड़े अधिकारियों के ऊपर अपने विभाग के दरोगाओं को बचाने का आरोप लगने पर अपना दल के प्रदेश अध्यक्ष और प्रयागराज के सोरांव विधानसभा क्षेत्र से विधायक जमुना प्रसाद सरोज ने जब प्रयागराज के कमिश्नर आर रमेश कुमार को पत्र लिखकर मजिस्ट्रेट जांच को कहा तो उन्होंने मजिस्ट्रेट जांच का आदेश ना कर सिर्फ और सिर्फ वह पत्र उठाकर जिला अधिकारी के पास भेज दिया और जिला अधिकारी ने वह पत्र उठाकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पास भेज दिया और वह पत्र वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पास पहुंचा ही नहीं । इसी मामले पर मैैंने प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मजिस्ट्रेटी जांच पर उनका रुख जानना चाहा तो उन्होंने पहले तो नजरअंदाज कर दीया उसके बाद कहा कि अभी कोविड-19 की बैठक लेने आए हैं बाद में बात होगी। तीसरी बार मेरे द्वारा वही प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पत्रकारिता छोड़कर नेतागिरी करिए उपरोक्त यह स्पष्ट होता है कि प्रयागराज के कमिश्नर, प्रयागराज के जिला अधिकारी ,प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और फूलपुर के पूर्व क्षेत्रअधिकारी उमेश शर्मा सभी कटघरे में खड़े होते हैं ।उपरोक्त में से कोई ऐसा अधिकारी नहीं है जिसके दरवाजे पर महिला न्याय मांगने के लिए ना गई हो परंतु उस महिला को कहीं से भी न्याय नहीं मिला इसके बाद जब प्रयागराज के ही पूर्व सांसद और वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में नंबर दो की हैसियत रखने वाले उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से इस बारे में जानकारी चाही गई तो जो उन्होंने जवाब दिया वो जगजाहिर है इस तरह की घटनाओं से यह कहा जा सकता है कि इस तरह के राजनेता और इस तरह के अधिकारी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस अभियान को पलीता लगा रहे हैं जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश की शक्ल और सूरत बदलने की ठानी है। पूरे उत्तर प्रदेश में पत्रकारों के साथ ही नहीं अधिवक्ताओं और आम आदमी के साथ भी आए दिन उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारी पुलिस के अधिकारी और अन्य विभागों के अधिकारी किस तरह का बर्ताव कर रहे हैं यह लगातार सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से पूरा देश देख रहा है। क्या उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री को इस तरह का बयान देना चाहिए वह भी तब जब मामला 8 माह की गर्भवती महिला को पीटने जैसा संवेदनशील प्रवृत्ति का हो? मैं इस मुद्दे पर कुछ भी लिखना और पढ़ना नहीं चाहता था परंतु 10 अगस्त को जब मैंने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से प्रश्न पूछा तो वह बौखला गए और हमको नेतागिरी की नसीहत दे दी उसके बाद वीडियो वायरल होने पर तमाम सारे लोगों ने हमसे कहा कि जब उप मुख्यमंत्री जी उस वीडियो में यह कह रहे हैं कि मैंने प्रार्थना पत्र ले लिया है उसके बावजूद तो नेतागिरी कर रहे हो। हमारा उन सभी मित्रों से विनम्रता पूर्वक एक प्रश्न है कि जिस दिन ये वीडियो वायरल किया गया उस दिन डिप्टी सीएम साहब को पत्र दिए हुए 18 दिन हो चुके थे यदि 18 दिन डिप्टी सीएम साहब कोई कार्रवाई न कर पाए हो तो इसमें मेरा कोई दोष नहीं है वहीं पर मैंने इस मामले में जब यह देखा कि डिप्टी सीएम के यहां से कोई कार्यवाही नहीं होगी, तो मैंने पिछले सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने का प्रयास किया और बिना अपॉइंटमेंट के भी मेरी मुलाकात हो पाई और उन्होंने मुझको सिर्फ 5 मिनट का समय दिया और कार्यवाही का आश्वासन दिया मुख्यमंत्री जी से मुलाकात करने के बाद हमें केशव प्रसाद मौर्य जी का वह बयान याद आ गया जिसमें उन्होंने हमको नेतागिरी करने की सलाह दी थी मैं यह नहीं जानता मुख्यमंत्री महोदय के यहां से उस महिला को न्याय मिलेगा या नहीं मिलेगा परंतु मैं यह अवश्य जानता हूं कि निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या से लाख बेहतर हैं। और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान से यह स्पष्ट हो चुका है कि अभी उनके अंदर वह परिपक्वता नहीं है जो एक शानदार राजनेता का निर्माण करती हो अन्यथा उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के गृह जनपद में एक 8 माह की गर्भवती महिला को पीटा जाता है और उसको डेढ़ माह तक भी न्याय नहीं मिलता है यह उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के साथ-साथ प्रयागराज के कमिश्नर प्रयागराज के जिला अधिकारी प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रयागराज के फूलपुर क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी के ऊपर बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है।

लेखक ने ही प्रयागराज के सराय इनायत थाने में 8माह की गर्भवती महिला और 2 पत्रकारों को पीटने पर प्रश्न पूछा था ।जिस पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लेखक को राजनीति करने की सलाह दी थी

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