जनता के लिए ‘सिंघम’ बन चुके हैं सिद्धार्थ सिंह, अपराधी खाते हैं खौफ

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विवेक रंजन सिंह।

फिल्मों में लाइट, कैमरा व एक्शन के बाद पुलिस की वर्दी में दिखने वाले कई अभिनेताओं के सिंघम रोल को आपने देखा होगा और पसन्द किया होगा पर रियल लाइफ में सिंघम बनना आसान नही है। यहां सचमुच गोलियां चलती हैं और नायक को सचमुच का अपराधियों से सामना करना पड़ता है। कभी कभी मुठभेड़ में गोली भी लग जाती है,अपराधी पुलिस को मारने की कोशिश भी करते हैं। कुलमिलाकर जो होता है उसमें कोई कैमरा नही होता,करके दिखाना पड़ता है। जोखिमभरे कदम उठाने पड़ते हैं खतरों से सामना करना पड़ता है। ऐसी ही कहानी है कौशाम्बी में तैनात उप निरीक्षक SOG सिद्धार्थ सिंह की,जिन्हें जनता ने उनके कार्य को देखते ‘सिंघम’ नाम दे दिया।

गोरखपुर से स्नातक तक की पढ़ाई करने के बाद सिद्धार्थ इलाहबाद आ जाते हैं और यहां से कॉमर्स(परास्नातक) की शिक्षा लेते है। उसके बाद उनका चयन पुलिस डिपार्टमेंट में हो जाता है और तब से वो जनता की सेवा कर रहे हैं।

सिद्धार्थ का बचपन से ही सपना था कि पुलिस विभाग में जाकर वो जनता के लिए भयमुक्त समाज बनाएं और अपराध को जड़ से मिटायें उनका यह सपना 2019 में पूरा हुआ। वर्तमान में वो कौशाम्बी जनपद में कार्यरत हैं।

सिद्धार्थ ने जनपद में रहकर करीब एक दर्जन अपराधियों के एनकाउन्टर किये और कई इनामी अपराधियों को गिरफ़्तार भी किया है। एक बार तो उनके शरीर पर गोली भी लग चुकी है इसके लिए उन्हें दो दिन अस्पताल में भर्ती भी रहना पड़ा है । पर जज्बा कहीं से कम नही हुआ।

कल की घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वो एक जुझारू व हिम्मती जवान हैं। गोतस्करी कर रहे सात अभियुक्तों को गिरफ्तार करने के लिए वो अपनी टीम के साथ अपराधियों से भिड़ गए। अपराधियों के पास अवैध असलहे भी थे। वे उनकी गाड़ी को भी रौंदने की कोशिश किये पर नाकाम रहे। सिंघम अंदाज़ में सिद्धार्थ सिंह व सैनी पुलिस की टीम ने उन सबको गिरफ्तार कर लिया।

सिद्धार्थ का कहना है कि जनता का प्यार व स्नेह है जो उनको सिंघम कहते हैं वो अपनी उपलब्धि के किये जनता का आभार प्रकट करते हैं।


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