प्रयागराज : खुद के सम्मान में जुटा रहा कटरा रामलीला, रेवड़ियों की तरह बांट दिए गए कलाकारों को प्रमाण पत्र

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 विवेक रंजन।
विवेक रंजन।

कटरा रामलीला मंचन के करीब तीन हफ़्ते बाद कलाकारों के सम्मान का आयोजन किया गया, जिसमे मुख्य अतिथि के रूप मे पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी व उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व राज्य मंत्री नरेंद्र कुमार गौर भी उपस्थित रहे। अतिथियों के समक्ष कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कटरा रामलीला समिति के पदाधिकारियों की उपस्थिति में स्मारिका का विमोचन किया गया तथा वहां पर पधारे लेखकों का सम्मान किया गया। सम्मान का यह क्रम करीब एक घण्टे तक चलता रहा।

केशव प्रसाद मौर्या ने अपने उद्बोधन में भाजपा द्वारा किये जा रहे कार्यों को गिनाया व राम मंदिर सहित अन्य चल रही धार्मिक परियोजनाओं के बारे में बताया। कम समय के चलते उन्हें कार्यक्रम के बीच जाना पड़ा जिससे सभी कलाकारों को उनके हाथों सम्मान न मिल सका।

उन्होंने सभी कलाकारों के साथ सामूहिक तस्वीर खिंचवाई और चले गए। बाद में सबको ऐसे ही प्रमाण पत्र दे दिया गया। कलाकारों का कहना है कि कमेटी के पदाधिकारी अपने ही सम्मान में लगे रहे और कार्यक्रम का नाम ‘रामलीला कलाकारों का सम्मान रखा’। कम से कम डेढ़ महीने की मेहनत में यदि उन्हें सही से मानदेय नही मिला तो सम्मान तो ठीक से मिलना चाहिए था।

आपको बताते चले कि इससे पहले  मानदेय को लेकर भी कलाकारों में असंतोष दिखा था,पर उसका कोई सार्थक निदान नही हो सका। करीब सत्तर से अधिक कलाकारों ने रामलीला को जीवंत बनाया और सम्मान कुछ मुख्य पात्रों का ही किया गया। बाकी को रेवड़ियों की तरह प्रमाण पत्र बांट दिया गया। यहां तक कि सम्मान मिलते वक्त दर्शक दीर्घा में भी कोई उपस्थित न था। भीड़ मुख्य अतिथि के पीछे चल दी और निर्देशक सुबोध सिंह कटरा रामलीला के अध्यक्ष के साथ सम्मान बांटते रहे। एक तरफ कलाकार दर्शकविहीन पांडाल में सम्मान पा रहे थे तो दूसरी तरफ दर्शक व पदाधिकारी अतिथियों को विदा करने व भोजन करने में जुटे थे।
कलाकारों का ऐसा सम्मान कहीं नही देखा गया। बतौर दर्शक मैं भी वहां उपस्थित रहा और पूरी गतिविधियों का आंकलन किया। कार्यक्रम ऐसा था कि कलाकारों के सम्मान के बहाने राजनीति चमकाने व अपनी कमेटी का प्रचार करना ही सबका उद्देश्य रहा। कई कलाकार तो अपने सम्मान को वहीं छोड़कर चले आये। कलाकारों का कहना था कि मात्र प्रशस्ति पत्र से क्या होगा। कम से कम मुख्य अतिथियों की उपस्थिति में सम्मान मिलता तो थोड़ा उत्साहवर्धन भी होता। लेकिन यह कार्यक्रम कलाकारों को मायूस कर गया। गिने चुने मुख्य कलाकारों को ही सम्मान पत्र देकर सम्मान समारोह मना लिया गया।

राम के आयोजन में रामदल को ही दरकिनार कर दिया गया। केशव प्रसाद मौर्य योजनाएं गिनाकर चले गए और कलाकारों को रेवड़ी के भाव सम्मान पाने के लिए छोड़ गए।
इस आयोजन में श्री लाल शुक्ल के राग दरबारी की एक पंक्ति याद आयी कि दुनिया मे काम कोई नही कर रहा,सब एक दूसरे के सम्मान में जुटे हैं।


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