माँ दुर्गा के आगमन का सूचक – महालया

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जयती भट्टाचार्या
महिषासुर मर्दिनी या महालया का इंतजार हम सब को रहता है क्योंकि यह नवरात्र के आने की सूचना देता है । महालया पितृ पक्ष की समाप्ति और मातृ पक्ष के प्रारंभ को दर्शाता है। इस दिन ब्रह्मा , विष्णु, महेश ने राक्षस राजा महिषासुर का वध करने के लिए मां दुर्गा का सृजन किया था जिसमें अन्य देवों की भी शक्ति थी। इस दिन पितृ पक्ष यानि शोक के दिन खत्म होते हैं और आनंद के दिन यानि देवी पक्ष का प्रारंभ होता है।
महालया दुर्गा पूजा से पहले मनाया जाता है। मां दुर्गा को सर्वोच्च शक्ति के रूप में जाना जाता है। इस दिन मां दुर्गा को धरती पर आमंत्रित किया जाता है। चंडीपाठ और कुछ गानों से मां को जगाया जाता है जैसे जागो तूमी जागो।
इसके पीछे एक कथा है, जब श्री राम लंका में रावण से सीता को छुड़ाने जा रहे थे तो उन्होंने मां दुर्गा की पूजा की थी। दुर्गा पूजा बसंत ऋतु में होता है। उस समय सभी देव देवी मां दुर्गा की प्रार्थना करने के लिए जागते हैं। महालया के दिन मां दुर्गा अपने बच्चों के साथ कैलाश से धरती पर आती हैं।
महालया दुर्गा पूजा के आने की सूचना लाता है और बंगाली समुदाय के लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है। महालया का प्रसारण ऑल इंडिया रेडियो पर 1930 से प्रारंभ हुआ था। देवी दुर्गा से संबंधित इस कार्यक्रम का बंगाली समुदाय के लोगों को इंतजार रहता था। इसमें चंडीपाठ में देवी की पूरी कथा होती है और गीतों द्वारा देवी को जगाया जाता है। यह कार्यक्रम भोर में होता था। महालया के अगले दिन नवरात्रि का प्रारंभ होता है और दसवें दिन विजयादशमी होती है। इस दिन मां अपने बच्चों के साथ कैलाश वापस चली जाती हैं।


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