अनुच्छेद 350 कहता है कि जहां एक नागरिक प्रत्यावेदन के माध्यम से शिकायत करता है, इसे अनिश्चित काल तक लम्बित नहीं रखा जा सकता: हाईकोर्ट

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( दिनेश शर्मा “अधिकारी “)।

नई दिल्ली- कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 350 कहता है कि जहां एक नागरिक प्रत्यावेदन के माध्यम से शिकायत करता है, उसे अनिश्चित काल तक बिना विचारे लम्बित नहीं रखा जा सकता है।

न्यायमूर्ति कृष्णा एस. दीक्षित की पीठ उस याचिका पर विचार कर रही थी जहां याचिकाकर्ताओं की शिकायत अधिकार क्षेत्र के अधिकारियों द्वारा उनके अभ्यावेदन पर विचार न करने से संबंधित थी। श्री. एच.सी. शिवरामू याचिकाकर्ताओं के वकील का तर्क था कि उक्त प्रत्यावेदन में अधिकारियों के हाथों कुछ कार्रवाई की मांग की गई है ताकि मंदिर में भक्तों के मुक्त प्रवाह को सुनिश्चित किया जा सके, याचिकाकर्ता उनमें से कुछ हैं।

श्री. बीवी कृष्णा, ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि विवाद प्रकृति में दीवानी है और इसे सिविल कोर्ट के समक्ष बेहतर तरीके से पेश किया जा सकता है।उच्च न्यायालय ने कहा कि “हमारे संविधान के अनुच्छेद 350 में कहा गया है कि जहां कोई नागरिक अधिकार क्षेत्र के अधिकारियों के समक्ष शिकायत करता है, उसे अनिश्चित काल तक बिना विचारे नहीं रखा जा सकता है।

इसी तरह के मामलों में, इस अदालत ने इस तरह की शिकायत पर विचार करने का निर्देश दिया है और इसलिए याचिकाकर्ताओं के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता है।”उपरोक्त के मद्देनजर, पीठ ने याचिका की अनुमति दी और दूसरे प्रतिवादी को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं के विषय के अभ्यावेदन पर कानून के अनुसार विचार करे।


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