केकड़ी मे ” तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत “ में 477 पुराने प्रकरणों का एक ही दिन में निस्तारण

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(दिनेश शर्मा “अधिकारी”)।

छोटी छोटी बातों को नजरअंदाज करने से ही दाम्पत्य सम्बन्धो में रहती है मधुरता-न्यायधीश जैन ।
अदालतों में समय व्यर्थ करने से अच्छा है, मधुर संबंधों से व्यापार करो- न्यायाधीश राणावत।
लोक अदालत ने कराया पति पत्नी का मिलन।

केकड़ी । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर शनिवार को केकड़ी न्यायालय में लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिसमें बार और बैंच का अद्भुत सांमजस्य देखने को मिला। लोक अदालत में पति पत्नी के मध्य लंबे समय से चले आ रहे विवाद का निस्तारण होने से पक्षकारों सहित अधिवक्ताओं में खुशी का माहौल देखने को मिला। न्यायाधीशों ने भी इस अवसर पर राहत की सांस लेते हुए अंतर्मन से खुशी जाहिर की।पक्षकारों के अधिवक्तागण ने बताया कि अपर जिला न्यायाधीश संख्या एक की अदालत में महेंद्र बागरिया ने अपनी पत्नी पूजा के खिलाफ दाम्पत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना की याचिका अपने अधिवक्ता गोविंद सोनी के माध्यम से पेश कर रखी थी। न्यायालय में उपस्थित पति पत्नी को न्यायाधीश कुंतल जैन सदस्य नवल किशोर पारीक,अधिवक्ता चेतन धाभाई,डॉ. मनोज आहूजा और गोविंद सोनी ने दोनों को समझाइश की जिस पर पत्नी पति के साथ जाने को राजी हो गई इस पर न्यायाधीश ने पति को समझाया कि सुखद वैवाहिक जीवन के लिए छोटी छोटी बातों को नजरअंदाज करना चाहिए तथा पत्नी का सम्मान करना चाहिए जिस पर दोनों पक्ष खुश होकर साथ गए।इसी प्रकार इस न्यायाधीश कविता राणावत की कोर्ट में विचाराधीन दो व्यापारियों के मध्य रुपयों के लेनदेन के झगड़े को आपसी समझाईश से निपटाया गया। न्यायाधीश कविता राणावत ने कहा कि कुछ रुपयों के खातिर जितना समय यहां खराब करोगे उसी समय में मधुर संबंधों के चलते व्यापार में ज्यादा रुपये कमाए जा सकते हैं साथ ही रिश्तों में मधुरता रखने से सभी क्षेत्रों में समुचित विकास हो सकेगा।उक्त मामले में पक्षकारों के अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह राठौड़,दशरथ सिंह व डॉ. मनोज आहूजा व भेरूसिंह राठौड़ का भी सहयोग महत्वपूर्ण रहा। इसी प्रकार चाचा भतीजे के मध्य हुए लड़ाई झगड़े के मामले में राणावत की समझाइश से दोनों ने गले लगकर नई पारी की शुरुआत की।भतीजे ने पांव छूकर माफी मांगी तो चाचा ने गले लगाया। राजीनामा करने वाले पक्षकारों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर करते हुए बधाई व शुभकामनाएं दी।दोनों ही पक्षों ने इस राजीनामा का श्रेय न्यायाधीश कविता राणावत को दिया। ताल्लुका विधिक सेवा समिति के सचिव दिनेश शर्मा ने बताया कि आज हुई लोक अदालत में कुल 477 प्रकरणों का निस्तारण किया गया जिसमें 4 करोड़ चौसठ लाख 13 हजार 336 रुपये की राशि के अवार्ड पारित हुए। उन्होंने बताया कि केकड़ी की अदालतों में विचाराधीन मामलों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के आदेश से दो बेंचों का गठन किया गया था। प्रथम बेंच की अध्यक्षता जिला एवं सेशन न्यायाधीश कुंतल जैन द्वारा की गई तथा सदस्य के रूप में नवल किशोर पारीक मौजूद रहे।इस बैंच द्वारा कुल 93 मामलों का राजीनामे के आधार पर निस्तारण किया गया जिनमें कुल 3,41,85000 रुपये के अवार्ड पारित हुए।इनमें बेंक से संबंधित प्री लिटिगेशन के 36 मामलों का निस्तारण हुआ जिनमें 15 लाख चोपन हजार 422 रुपये की राशि के अवार्ड पारित हुए। इसी प्रकार द्वितीय बैंच की अध्यक्षता न्यायाधीश कविता राणावत द्वारा की गई एवं सदस्य के रूप में एडवोकेट मुकेश गढ़वाल मौजूद रहे। जिसमें 384 प्रकरणों का निस्तारण किया गया जिसमें एक करोड़ 22 लाख 28 हजार 336 के अवार्ड पारित हुए जिनमें से उपखंड भिनाय से संबंधित कुल 44 प्रकरणों का निस्तारण हुआ जिनमें कुल 46,708 रुपये के अवार्ड पारित हुए। उपखंड केकड़ी से संबंधित कुल 19 प्रकरणों का निस्तारण हुआ। लोक अदालत की कार्यवाही में बार अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह राठौड़,पूर्व अध्यक्ष चेतन धाभाई,सुरेंद्र सिंह राठौड़,अधिवक्ता हेमंत जैन,नवलकिशोर पारीक, डॉ.मनोज आहूजा,पवन सिंह भाटी,दशरथ सिंह कांडलोट,अजय पारीक,लोकेश शर्मा,हनुमान प्रसाद शर्मा,नितिन जोशी,अनुराग पांडे,भेरूसिंह राठौड़ आदि ने सक्रिय भूमिका निभाई।ताल्लुका विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव दिनेश शर्मा, आशाराम कुमावत,रीडर हफीज खान,कमल किशोर भाटी,यादराम मीणा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।वहीं होमगार्ड रामअवतार,शिवराज, सुरेंद्र, दिलखुश,शिवराम ने लोक अदालत को सफल बनाने के लिए उचित प्रचार, प्रसार व व्यवस्थाओं में सहयोग दिया।


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